अरकम

पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादों को
उनके मुक़द्दर के सफ़ेद पन्ने कोरे नहीं होते।
ख्वाइश बस इतनी सी है कि लोग मेेरे लफ़्ज़ों को समझो ।
आरज़ू ये नही की लोग वाह वाह करें ।।

- अरकम खान

No comments:

Post a Comment

Arkam Khan

Arkam ducky